style="text-align: left;"> मन तो बहुत कर रहा है चीखने चिल्लाने का लेकिन कर भी क्या सकता हु ये अपना शहर प्रयागराज बुलाता बड़ी खुशी से है बस छुटने पर रुलाता बहुत है कुछ घर की यादें भी उसी में अपनापन लेकर आता है बस आंख को नम करके चला जाता है
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