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फ़रवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
style="text-align: left;"> मन तो बहुत कर रहा है चीखने चिल्लाने का  लेकिन कर भी क्या सकता हु ये अपना शहर प्रयागराज  बुलाता बड़ी खुशी से है बस छुटने पर रुलाता बहुत है कुछ घर की यादें भी  उसी में अपनापन लेकर आता है बस आंख को नम करके चला  जाता है   
 तुम हमारी सराफत पूछते हो, वो भी हमीं से । लगता है इस शहर के नए किरायेदार हो तुम।। ❣️ ✍️Santo