संदेश

जून, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मां

  कि कर लूं इतनी कमाई  तेरे आंगन में सजा दूं  चांद तारों की दुनियां तू कहे तो पानी ला दूं तू कहे तो पेड़ लगा दूं रेत की दुनियां में  मरीचिका सा खूबसूरत महल बना दूं पूरी दुनियां को  एक ओर करके  तेरी अलग दुनियां बना दूं  बोल न मां आज चुप क्यों है तेरे लाडले ने ये बातें कही तू कहे तो सच करके दिखा दूं आज मैं तेरे आंचल के छांव में  सोना चाहता हूं खुद ही रोना चाहता हूं लाख कमाने के बाद भी  तेरी आंचल न नसीब हो तो  बोल न मां क्या पूरी दुनियां जला दूं तेरे चरणों में मैं अपनी दुनियां बसा लूं Santo

अकेलापन

मैं बस चुप चाप चला जा रहा  लोगो की भीड़ में अकेला होता जा रहा साथ बहुत लोग चल रहे हैं पर मुझे अकेलापन घेरे जा रहा  मैं सांस ले रहा हु फिर सांसे रुकी सी जा रहीं मुझे अंदर ही अंदर खूब रोना आ रहा और मैं बाहर से ही शांत होता जा रहा  मैं खुद को जोकर सा हंसा रहा  मेरी धड़कने रुकने सी हैं और सब खुश हैं अपनी जिंदगी में बस मुझे छोड़कर  मेरा दिल अंदर ही अंदर बैठा जा रहा और सामने वाले को बस मजा आ रहा डर है मुझे की कहीं ये सांसे टूट न जाएं बहुत कुछ करना था इस छोटी सी उम्र में पत्थर को पानी से तोड़कर, एक नया रास्ता बना रहा बहुत ही जल्दी रूबरू हो जाता हूं सच्चाई से पर क्या करूं खुद रोऊं तो गैर सा लगा जा रहा कुछ है जो अपना सा फिर भी दूर जा रहा बड़ी उलझने बढ़ गई इस छोटी सी जिंदगी में बस अगले की पल लगता की मुझसे अब चला न जा रहा थक गया हूं इस कदर कि अब रुका भी न जा रहा  कुछ हो न जाए खराब इस मोड़ पर  अब जिंदगी भी मुझसे दूर जा रहा।। -santo