अकेलापन

मैं बस चुप चाप चला जा रहा 

लोगो की भीड़ में अकेला होता जा रहा

साथ बहुत लोग चल रहे हैं

पर मुझे अकेलापन घेरे जा रहा 

मैं सांस ले रहा हु फिर सांसे रुकी सी जा रहीं

मुझे अंदर ही अंदर खूब रोना आ रहा

और मैं बाहर से ही शांत होता जा रहा 

मैं खुद को जोकर सा हंसा रहा 

मेरी धड़कने रुकने सी हैं और

सब खुश हैं अपनी जिंदगी में बस मुझे छोड़कर 

मेरा दिल अंदर ही अंदर बैठा जा रहा

और सामने वाले को बस मजा आ रहा

डर है मुझे की कहीं ये सांसे टूट न जाएं

बहुत कुछ करना था इस छोटी सी उम्र में

पत्थर को पानी से तोड़कर, एक नया रास्ता बना रहा

बहुत ही जल्दी रूबरू हो जाता हूं सच्चाई से

पर क्या करूं खुद रोऊं तो गैर सा लगा जा रहा

कुछ है जो अपना सा फिर भी दूर जा रहा

बड़ी उलझने बढ़ गई इस छोटी सी जिंदगी में

बस अगले की पल लगता की मुझसे अब चला न जा रहा

थक गया हूं इस कदर कि अब रुका भी न जा रहा 

कुछ हो न जाए खराब इस मोड़ पर 

अब जिंदगी भी मुझसे दूर जा रहा।।


-santo 

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