कोई रातों को जगता है दिन को जीने के लिए कोई दिन में थकता है जिंदगी जीने के लिए कोई पीता है किसी को याद आने के लिए कोई पीता है किसी को याद न आने के लिए सुबह से शाम हो जाती है कहीं तक जाने के लिए राते भी सो गई है मेरे बिन , लोग खो जाते हैं रोने के बाद सड़के भी सुनसान सी हो गई हैं कल का सूरज भी निकलने को है जग सारा रुका हुआ लग रहा है मैं क्यूं नहीं रुक पाता हां मैं शराब क्यूं नहीं पी पाता, लगता है खोने से डरता हूं मैं और एक तुम हो मेरा ख्याल न रहा तुमको तुमने पलक झुका कर हमको बेजुबान कर गए हम तेरे एहतराम में रह गए तुम किसी और के शाम में बस गए हमारी जिंदगी सुनी करके किसी और की नजर बन गए मैं खुद ही टूट रहा हूं मैं खुद से रूठ रहा हूं खुद को ही अंदर ही अंदर जला रहा हूं कल को खुद ही बदल जाऊंगा बस आज ही थोड़ा बिगड़ गया हूं आज की शाम नहीं जी रहा हूं कल का सुबह जीने की कोशिश करेंगे अब हद से ज्यादा न बिगड़ेंगे, कर रहा हूं शिकायतें खुद से कुछ नया बुनने में लगा हूं मैं अपने आप में खुद एक सूरज हूं। अंधेरों से खुद ही लड़ा हूं मैं अपने आप में खुद एक सूरज हूं।। -Santo
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दीवारें
दीवारें कुछ ऐसे भी दीवारें होती हैं जो जीना सिखाती हैं कुछ ऐसी भी होती हैं जो घुटन का अहसास कराती हैं हमने ऐसा भी सुना है कि इन दीवारों के भी कान होते हैं कुछ हिरण्यकश्यप के तो कुछ प्रहलाद के होते हैं। कोई इसके बाहर की जिंदगी जीना चाहता है तो कोई इसके सहारे जिंदगी पाना चाहता है कभी कभी दीवारें एक सरहद भी होती हैं जो उस तरफ जान जा रही होती है और इस तरफ जश्न मन रहा होता है थोड़ा धीरे ही बोलो मैंने अभी तो बताया न कि दीवारों के भी कान होते हैं।। कोई बरसात में भी भीगता है इसको बनाने के लिए कोई वसीयत में पाता है इसको गंवाने के लिए इसकी कीमत दो तरह से मापी जाती है कोई इसको बंगला या कोठी कहता है कोई इसको अपनी गरीब की कुटिया कहता है।। थैंक यू 😊 --✍️Santo
Abe भाई गज़ब
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