संदेश

अनछुए पहलु ❣️

मै क्लास 8th में था तब की बात है । मुझे मालूम भी नहीं था कि किसी   से प्यार किया जाता है या हो जाता है । मै बहुत शर्मीला टाइप का लड़का था , सो मुझे लड़कियां तो पसंद थी लेकिन मै उनसे बात नहीं कर पाता था । मेरे ही क्लास में एक नया एडमिशन था उसका नाम था दिव्या ।          पता नहीं था मुझे लेकिन साथ वाले लड़के जो केयर सबकी करते थे उन्होंने बताया कि तुझे लाइक करती है वो। सो मुझे ये बड़ा अजीब सा लगा की आखिर मुझमें ऐसा क्या है।   न दिखने में सुंदर न टॉप करने वाला लेकिन ठीक ठाक था मै पढ़ने में। अक्सर क्लास लगने पर जब वो डांट खाती तो मेरी ओर देख कर हसने लगती , मतलब मुझे इतना खराब  लगता कि क्या ही बताऊं।मै साल भर उसको इग्नोर करके उस स्कूल से दूसरे स्कूल में चला गया। वहां जाकर ऐसा लगा कि क्या मुझे भी उसका साथ देना चाहिए था? लेकिन तब तक समय बदल चुका था। मै नए कॉलेज में महिला मित्र कि तलाश करने लगा तो जिस क्लास में हम बैठे थे वहां की दूसरी सीट पर आगे ही हम बैठे थे। मैडम ने किसी को बुलाया as a मॉनिटर । भाई साहब क्या बताऊं मुझे वो लड़की इतनी पसंद आई कि चार साल को...

अनसुने

  कैसे भुला दूं उन आंखों को ।  जिनको याद किया था ।  किताबों की तरह ।।  सोचा था कि कुछ देर ही सही   कोई  पूछ कर जाएगा ही    लेकिन जिनकी आंखे थी    वो ही ठुकराएगी हमें।।   ऐसा काश सोचा होता हमने    क्या ग़लत क्या सही ,  कोई और मुझे बतलाएगा क्या।। crossorigin="anonymous">