संदेश

TEA LOVER

 Love U with Tea मैं तेरे हर झूठ को  सच मान बैठा हूं। जब से तुमने  चाय की एक  घूंट साथ पी रखा है।। चाय का पेमेंट  अक्सर तो मैं ही कर देता हूं लेकिन तुम भी कभी  कर देना इसकी कीमत अदा मत करना मुझे  इस तरह इग्नोर की मैं हर चुस्की को घुटन सा समझूं। ✍️ Santo

TEA WITH YOU

Love with Tea 1 उसने कहा था कि  कभी साथ बैठकर  चाय पियेंगे । हम आज भी उसका इंतजार  करते हैं कि क्या पता  कभी मैसेज कर के  कह दे की आज की शाम  तुम और सांवली चाय तेरे साथ में।❤️  ✍️Santo

चाय

Love With Tea  कि तुम उस चाय की  टपरी पर जाया करो  जहां मैं जाया करता हूं। क्या पता की उस चाय की तरह मेरी मेरी सांवली सूरत भी  तुमको पसंद आ जाए। -✍️Santo

दीवारें

 दीवारें कुछ ऐसे भी दीवारें होती हैं जो जीना सिखाती हैं कुछ ऐसी भी होती हैं जो घुटन का अहसास कराती हैं हमने ऐसा भी सुना है कि इन दीवारों के भी कान होते हैं कुछ हिरण्यकश्यप के  तो कुछ प्रहलाद के होते हैं। कोई इसके बाहर की जिंदगी  जीना चाहता है तो कोई इसके सहारे जिंदगी पाना चाहता है कभी कभी दीवारें एक सरहद  भी होती हैं जो उस तरफ जान जा रही होती है  और इस तरफ जश्न मन रहा होता है थोड़ा धीरे ही बोलो  मैंने अभी तो बताया न  कि दीवारों के भी कान होते हैं।। कोई बरसात में भी भीगता है इसको बनाने के लिए कोई वसीयत में पाता है  इसको गंवाने के लिए इसकी कीमत दो तरह से मापी जाती है कोई इसको बंगला या कोठी कहता है कोई इसको अपनी गरीब की कुटिया कहता है।। थैंक यू 😊 --✍️Santo

अनछुए पहलु ❣️

मै क्लास 8th में था तब की बात है । मुझे मालूम भी नहीं था कि किसी   से प्यार किया जाता है या हो जाता है । मै बहुत शर्मीला टाइप का लड़का था , सो मुझे लड़कियां तो पसंद थी लेकिन मै उनसे बात नहीं कर पाता था । मेरे ही क्लास में एक नया एडमिशन था उसका नाम था दिव्या ।          पता नहीं था मुझे लेकिन साथ वाले लड़के जो केयर सबकी करते थे उन्होंने बताया कि तुझे लाइक करती है वो। सो मुझे ये बड़ा अजीब सा लगा की आखिर मुझमें ऐसा क्या है।   न दिखने में सुंदर न टॉप करने वाला लेकिन ठीक ठाक था मै पढ़ने में। अक्सर क्लास लगने पर जब वो डांट खाती तो मेरी ओर देख कर हसने लगती , मतलब मुझे इतना खराब  लगता कि क्या ही बताऊं।मै साल भर उसको इग्नोर करके उस स्कूल से दूसरे स्कूल में चला गया। वहां जाकर ऐसा लगा कि क्या मुझे भी उसका साथ देना चाहिए था? लेकिन तब तक समय बदल चुका था। मै नए कॉलेज में महिला मित्र कि तलाश करने लगा तो जिस क्लास में हम बैठे थे वहां की दूसरी सीट पर आगे ही हम बैठे थे। मैडम ने किसी को बुलाया as a मॉनिटर । भाई साहब क्या बताऊं मुझे वो लड़की इतनी पसंद आई कि चार साल को...

अनसुने

  कैसे भुला दूं उन आंखों को ।  जिनको याद किया था ।  किताबों की तरह ।।  सोचा था कि कुछ देर ही सही   कोई  पूछ कर जाएगा ही    लेकिन जिनकी आंखे थी    वो ही ठुकराएगी हमें।।   ऐसा काश सोचा होता हमने    क्या ग़लत क्या सही ,  कोई और मुझे बतलाएगा क्या।। crossorigin="anonymous">