अनसुने
कैसे भुला दूं उन आंखों को ।
जिनको याद किया था ।
किताबों की तरह ।।
सोचा था कि कुछ देर ही सही
कोई पूछ कर जाएगा ही
लेकिन जिनकी आंखे थी
वो ही ठुकराएगी हमें।।
ऐसा काश सोचा होता हमने
क्या ग़लत क्या सही ,
कोई और मुझे बतलाएगा क्या।।
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