ये मनहूस सा समय

 ये मनहूस सा समय

ये मनहूस सी बीमारी

और ये मनहूस से लोग

वक्त को जरा भी आहट 

न हुई बदलने को 

कि उससे पहले लोग 

बदल गए

पहले हम तो समझते थे जिसको 

अपना सबसे बड़ा करीबी 

वो ही बदल गए

जो था मेरा हितैषी 

मेरा भला चाहने वाला

मैं क्या बताऊं वक्त की तकरार

की जब वक्त की मार पड़ी 

वो हमको ही अकेला छोड़ गए

जिनसे थी उम्मींदे की 

मेरे सर को अपने कंधे से 

टिकाएंगे उनसे उम्मीद न थी कि 

वो इतनी जल्दी कि

 वक्त से पहले अपने लोग ही 

बदल जायेंगे।

चल रहा है वो दौर 

जहां इंसान ,इंसान को 

न पहचानेगा और चहारदीवारी 

में कैद होकर सारे अपने लोग

और उनकी की हुई 

मदद को , मदद के समय ही 

भूल जाता है 

ये मनहूस सा समय

ये मनहूस सी बीमारी

और ये मनहूस से लोग।

😓

-✍️ Santo

07 June 2021 at 4:08 am

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दीवारें