sigma rule

मैं खड़ा था जिस मोड़ पे

वहां रास्ते अनेक थे 

दिमाग में घूमते विचार सारे नेक थे

काम था कुछ ऐसा की नाम करना भी 

ऐम था 

मैं खड़ा था जिस मोड़ पर वहां रास्ते अनेक थे

आने वाला टाइम बड़ा ही खराब था 

क्योंकि मैंने खुद न बनाया अपना साम्राज्य था

करना था ऐसा जो कुछ तो अलग

और थोड़ा मजेदार था

दिमाग घुमा ऐसा कि जैसे

कोई सामने तूफान खड़ा था 

तेज़ के साथ मुझसे ही लड़ा था

आया न समझ फिर खुद ही चुना था

आने वाला वक्त को सिग्मा रूल बना था

अब मैं अकेले ही निकल पड़ा था

जिस राह से आया था 

आज वहां भीड़ खड़ा था 

हां मैंने भी एक दिन खुद से लड़ा था

सिग्मा रूल की तरह हां 

मैं भी अकेले ही चला था।

जिंदगी की बाते सिर्फ सुनने आसान है लगती 

लेकिन उसका क्या जो राह पर है चलती

पत्थर से टकराया कड़ी धूप थी

फिर एक बादल था आया 

थोड़ा सा सुकून पूरे घाव भर आया 

मैं था अकेला जो घर से 

अकेला ही चला आया ।

अब समझ आती है ये बात थोड़ा सा मेहनत 

जिंदगी की बदल देती है रात 

जो तुझको ज्ञान दे 

उसपर न ध्यान दे 

आने वाली गाड़ी को अपने टाइम से जान दे

जो रोकेगा तेरो को 

खुद ही समझ जाएगा 

आने वाला वक्त भी झुककर सलाम देकर जायेगा

थोड़ा सा लिहाज को गरम थोड़ा सा 

नरम रख अभी इस दिल को 

बड़ा मजा आयेगा 

जब जिंदगी की बाते तू 

खुद ही बताएगा 

लोगो की भीड़ खुद चलकर 

तुझको सुनने आएगा ।

 

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