नींद

जब हमको नींद नहीं आती है

तो ये राते भी बड़ी हो जाती हैं

काटने से भी नहीं कटती 

क्या कहूं ये रात वही है

जो किसी के लिए नए 

सबेरे का सूरज लेके आती है 

और किसी का सूरज डूबा के 

चली जाती है।

जरा सा आंखे बन्द करके

सोने की कोशिश करो 

तो अंधेरे में बस घड़ी की टिक टिक 

की आवाज आती है 

कैसे बयां करूं मैं इस 

भयावह काली रात को 

की मुझे ही मेरी धड़कन 

की आवाज सुनाई जाती है

कि मैं कैसे बयां करूं 

इस भयावह काली रात को

कि मुझे ही मेरी धड़कन 

की आवाज सुनाई दे जाती है।

बदलते रहते हैं हम सिर्फ करवट

फिर ये नींद नहीं आती है

मैं कैसे बयां करूं इसको

कि ये मुझे ही मेरी धड़कने सुना जाती है।

लोग कहते हैं कि

 पूर्णिमा की रात बड़ी अच्छी होती है

और अमावस्या की बड़ी खराब 

अरे उनसे पूछो ना कि जिसका कोई 

प्रिय पूर्णिमा को छोड़ जाता है 

और अमावस्या पर किसी 

के घर का नया चिराग आता है।

ये रात बड़ी लंबी होती है

बड़ी हसीन और बड़ी गमगीन होती है

जब हमको नींद नहीं आती है

तो ये रातें भी बड़ी हो जाती हैं

कि कैसे बयां करूं मैं इस

भयावह काली रात को

कि मुझे ही मेरी धड़कन सुना जाती है।

😓

-✍️Santo


07 june 2021 at 4:24 am 

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