कि तुम उन अनजान शहर की तरह हो

जो मुझको दूर से ही अच्छा लगता है।

मैं जितना जानने की कोशिश करता हूं तुमको

तुम वहां की उलझी हुई गलियों सा लगती हो।।

सुलझा क्यूं नहीं देती हो एक बार में ही

ये उलझी हुई पहेलियों को 

और कह दो की बात सीधी सी है

हम आएं तो हाइवे से लेकिन 

तेरे शहर के गलियों में 

हमें उलझने ही न दो ।

माना की बड़े सुनी हैं यहां की सड़के

पर तुझे तेरा ही होने न दें।

कि सुलझा क्यूं नहीं देती हो एक बार में ही

इन उलझी हुई पहेलियों को।😊


 

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