मर्ज़

Marz

हर मर्ज की दवा होती है

बस आपको खरीदना नहीं पड़ता 

लोग खुद ही दे जाते हैं

कुछ लोग तो होते ही 

बेईमान है

 उनको ईमान बेचना नहीं पड़ता 

खुद ही सरेआम बिक 

जाते हैं, कुछ तो 

कुछ तो खुद का दाम 

भी अच्छा लगाते हैं।

धोखा, ऐसी चीज है 

जो बिना खाए समझ में नहीं आती

और वो लोग कहते हैं कि

"कैसे विश्वास कराऊं तुमको 

ये बात मुझे समझ नहीं आती"

पांव में ठोकर लगे खून बह जाए

तो ही अच्छा है । घर खाली हो तो 

कोई कुत्ता या टॉमी पाल लो

बस दूर रहना इन आस्तीन के 

सांपो से जो तुमको असहाय करके

सहारे के लिए अपनी अहमियत गिनाते हैं

कि हर मर्ज की दवा होती है

तुमको खरीदना नहीं पड़ता

लोग खुद ही दे जाते हैं।।😐😐


-✍️ Santo



 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दीवारें