प्रेम
प्रेम,प्रेम ही होता है
चाहे वो राधा कृष्ण से करे
या मीरा कृष्ण से करे
वो प्रेम ही था जो
सुदामा भी कृष्ण से किए थे
प्रेम अलौकिक होता है
जिसकी कोई सीमा नही होती
इसके खातिर वो खुद का त्याग भी kar सकता है
और किसी को पा भी सकता है
किसी भी बंधन को तोड़ करके
या किसी बंधन को जोड़ करके
कोई प्रेम करता है
तो श्री कृष्ण ही क्यों राधा के हैं
तो श्री कृष्ण क्यूं राधा के हैं।
👍।
-✍️Santo
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें