सब दोष देते हैं इस निर्जीव से फोन को

कोई अपने को दोष नही देता 

कभी सोचा क्यों नही की 

इसको ऑफ भी तो कर सकते हैं

कोई रोका तो नहीं

अपने मतलब से है ये दुनिया

कभी खाली बैठे फोन चलाते है

कभी डिस्टर्ब होकर फोन चलाते हैं

कभी सफर में फोन चलाते हैं

बस अपना टाइम काट जाते हैं


फिर भी दोष देते हैं कि 

ये फोन हमको बर्बाद करते जाते हैं

 

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