मैं हर रोज वही भूल करता हूं

मैं हर रोज वहीं फूल फेंकता हूं।

चुभ जाते हैं जिनके कांटे उंगलियों में

आज भी उन्ही फूलों को सींचता हूं।।


-Santo 

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