शायर कहकर बदनाम ना कर,


मैं तो
रोज़ शाम को दिनभर का ‘हिसाब’ लिखता हूँ !🙂🙂🙂

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दीवारें