संदेश

मां

  कि कर लूं इतनी कमाई  तेरे आंगन में सजा दूं  चांद तारों की दुनियां तू कहे तो पानी ला दूं तू कहे तो पेड़ लगा दूं रेत की दुनियां में  मरीचिका सा खूबसूरत महल बना दूं पूरी दुनियां को  एक ओर करके  तेरी अलग दुनियां बना दूं  बोल न मां आज चुप क्यों है तेरे लाडले ने ये बातें कही तू कहे तो सच करके दिखा दूं आज मैं तेरे आंचल के छांव में  सोना चाहता हूं खुद ही रोना चाहता हूं लाख कमाने के बाद भी  तेरी आंचल न नसीब हो तो  बोल न मां क्या पूरी दुनियां जला दूं तेरे चरणों में मैं अपनी दुनियां बसा लूं Santo

अकेलापन

मैं बस चुप चाप चला जा रहा  लोगो की भीड़ में अकेला होता जा रहा साथ बहुत लोग चल रहे हैं पर मुझे अकेलापन घेरे जा रहा  मैं सांस ले रहा हु फिर सांसे रुकी सी जा रहीं मुझे अंदर ही अंदर खूब रोना आ रहा और मैं बाहर से ही शांत होता जा रहा  मैं खुद को जोकर सा हंसा रहा  मेरी धड़कने रुकने सी हैं और सब खुश हैं अपनी जिंदगी में बस मुझे छोड़कर  मेरा दिल अंदर ही अंदर बैठा जा रहा और सामने वाले को बस मजा आ रहा डर है मुझे की कहीं ये सांसे टूट न जाएं बहुत कुछ करना था इस छोटी सी उम्र में पत्थर को पानी से तोड़कर, एक नया रास्ता बना रहा बहुत ही जल्दी रूबरू हो जाता हूं सच्चाई से पर क्या करूं खुद रोऊं तो गैर सा लगा जा रहा कुछ है जो अपना सा फिर भी दूर जा रहा बड़ी उलझने बढ़ गई इस छोटी सी जिंदगी में बस अगले की पल लगता की मुझसे अब चला न जा रहा थक गया हूं इस कदर कि अब रुका भी न जा रहा  कुछ हो न जाए खराब इस मोड़ पर  अब जिंदगी भी मुझसे दूर जा रहा।। -santo 
 मैं दर्द के दरिया में इस कदर बहता रहा , कि किनारे लगकर भी दर्द सहता रहा । बेजुबान की दर दर भटकता रहा, दूसरों से रो रो कर खुद का पता पूछता रहा।। हो गया इतना बेजान की दुनिया पराई और  खुद को अपना समझता रहा ।
style="text-align: left;"> मन तो बहुत कर रहा है चीखने चिल्लाने का  लेकिन कर भी क्या सकता हु ये अपना शहर प्रयागराज  बुलाता बड़ी खुशी से है बस छुटने पर रुलाता बहुत है कुछ घर की यादें भी  उसी में अपनापन लेकर आता है बस आंख को नम करके चला  जाता है   
 तुम हमारी सराफत पूछते हो, वो भी हमीं से । लगता है इस शहर के नए किरायेदार हो तुम।। ❣️ ✍️Santo

दर्पण

#सहभागिताशब्दालयप्रतियोगितालेखन #विषय :- दर्पण (स्वयं से पहचान) कभी कभी सोचो तो लगता है जीवन में क्या हो रहा है, हम क्या कर रहे है और हमे क्या करना चाहिए और क्या नहीं। इसके लिए हमें किसी चीज, वो चाहे इंसान हो या निर्जीव,  की जरूरत पड़ती है, वही आईना (दर्पण) होता है। जो कभी कभी शीशे तो कभी कभी दोस्त या घर परिवार का कोई सदस्य होता है जो हमको दिखा जाता है। ये समाज है जो हमारे किए हुए व्यवहार का एक परिणाम देता है जिसे हम दर्पण कह सकते हैं। उसी शीशे के दर्पण के सामने स्त्रियां अपने माथे की बिंदी को निहारती हैं और पुरुष अपनी टाई और कोट को देख कर आगे बढ़ जाते हैं। क्या कभी आपने खुद को दर्पण में खुद से बात किया है, नहीं न , तो आज जाकर खुद से बाते करो आईने के सामने  अपने आंखों में आंखे डालकर तो पता चलेगा कि तुम क्या हो  एक आत्मविश्वास जग जायेगा की हमने खुद से खुद को सिखाया है। ये आईना अपना है पराया नहीं । जो हमको जीना भी सिखाता है  जीने के तरीके बताता है गर शीशा पर धूल है तो चारो तरफ का संसार ही गंदा दिखेगा यदि शीशा स्वच्छ है तो पूरी दुनिया निराली लगेगी।( यहां चरित्र क...
नब्ज़ और शब्द हर कोई समझ नहीं पाता सब बातें नहीं बताई जाती  कुछ बात भी राज होती है पहले हम नादान थे  हर बात को को बताते थे फिर कुछ लोग आए उनसे सीखा  कि दुनिया में तीसरी आंख भी होती है जो सबको परखने के लिए होती है ✍️Santo 
🙏पापा🙏 चंद लम्हों को मैंने संजोया था एक दिन मैं बहुत रोया था पता नही क्या खता हुई थी हमसे  की उस दिन मैं गलत टाइम पर  सोया था । अब न जाने क्यूं  वो चेहरा नजर नही आता जो अब सिर्फ जेहन  में आता है करता हु मै अब  उनका इंतजार क्या पता फिर से कहीं वो  मिल जाएं और मैं कह दूं  कि आज रात को मैं  नहीं सोया और आपके लिए सारी रात मैं रोया 😓😓😓  I'm really missing you MY LORD😓  Apka Beta ✍️"Santo" 
मै क्या हूँ आपके सामने  मैं क्या ही लिखू  मेरी कमजोरी ही मेरी ताकत है  मैं कमज़ोर हूँ लेकिन मेरी कलम नहीं  जब चलने को आती है तो ठहरती नहीं 

GOD

God उसने कहा की भगवान को मानते हो मैने भी कह दिया कि घर पर रहता हूं तो मां पिता को  ही जानता हूं  बाहर जाता हूं सबको एक साथ याद करता हूं क्यूं मां की दुआ साथ रहती है  वो भगवान को पूजती है  और मैं उसको 😊 
की तुम रात की सुनसान सी  वो सड़क हो जिसपर मुझे  डर तो लगता बहुत है  लेकिन ये भी है मजा बहुत आयेगा तुम हवाओं की तरह साथ  तो रहोगी मगर एक आहट  ही बड़ा सताएगी  तुम उस सुनसान सड़क सी हो  जिसपर मुझे डर तो लगता बहुत है लेकिन ये भी है कि मजा बहुत आयेगा। 
IPL तुम बेशक मोहब्बत करो चेन्नई सुपर किंग्स या मुंबई इंडियंस को  लेकिन मैं हर खिलाड़ी को पसंद करता हूं। जब दो टीमों के बीच मैच होता है तो  मैं हमेशा हारने वाली टीम को  जीतते हुए देखना चाहता हूं। मुझे भी पसंद है सट्टा लगाना  लेकिन जंग के मैदान को मैं  अपना समझता हू  कभी किसी सीज़न में मैने  राजस्थान रॉयल्स को लेकर मैने कई जीत  देखें हैं  बस भरोसा रखा कर un खिलाड़ियों पर  जो तुम्हे सट्टा लगाने पर जोर कसते हैं 
कि तुम उन अनजान शहर की तरह हो जो मुझको दूर से ही अच्छा लगता है। मैं जितना जानने की कोशिश करता हूं तुमको तुम वहां की उलझी हुई गलियों सा लगती हो।। सुलझा क्यूं नहीं देती हो एक बार में ही ये उलझी हुई पहेलियों को  और कह दो की बात सीधी सी है हम आएं तो हाइवे से लेकिन  तेरे शहर के गलियों में  हमें उलझने ही न दो । माना की बड़े सुनी हैं यहां की सड़के पर तुझे तेरा ही होने न दें। कि सुलझा क्यूं नहीं देती हो एक बार में ही इन उलझी हुई पहेलियों को।😊  
ज़ख्म 😓 जख्म चाहे जैसे हो भरने में वक्त लगता है। दर्द भी बहुत करता है ।। लेकिन वो ज़ख्म भरे भी नहीं होते  कि फिर कहीं से जख्मी हो जाते हैं। वो ज़ख्म चाहे जाने में मिले हो  या अनजाने में। ✍️Santo 
 वो कहते थे कि  तुम बहुत याद आओगे मैने भी कह दिया था कि हम भी याद करेंगे तुमको पर हमको क्या पता था  की वो इसी lockdown  me Sunday ki तरह  हमको भी भूल जायेंगे हमने भी संदेशा भेजा  की हमने कहा था न हम तुमको बहुत मिस करेंगे  लेकिन तुम तो अपनी बातो से भी मुकर गए  और हम कहते रह गए  कि तुम बहुत याद आओगे। कि तुम बहुत याद आओगे।। 😓 ✍️Santo 07June2021 at 4:06 am
sigma rule मैं खड़ा था जिस मोड़ पे वहां रास्ते अनेक थे  दिमाग में घूमते विचार सारे नेक थे काम था कुछ ऐसा की नाम करना भी  ऐम था  मैं खड़ा था जिस मोड़ पर वहां रास्ते अनेक थे आने वाला टाइम बड़ा ही खराब था  क्योंकि मैंने खुद न बनाया अपना साम्राज्य था करना था ऐसा जो कुछ तो अलग और थोड़ा मजेदार था दिमाग घुमा ऐसा कि जैसे कोई सामने तूफान खड़ा था  तेज़ के साथ मुझसे ही लड़ा था आया न समझ फिर खुद ही चुना था आने वाला वक्त को सिग्मा रूल बना था अब मैं अकेले ही निकल पड़ा था जिस राह से आया था  आज वहां भीड़ खड़ा था  हां मैंने भी एक दिन खुद से लड़ा था सिग्मा रूल की तरह हां  मैं भी अकेले ही चला था। जिंदगी की बाते सिर्फ सुनने आसान है लगती  लेकिन उसका क्या जो राह पर है चलती पत्थर से टकराया कड़ी धूप थी फिर एक बादल था आया  थोड़ा सा सुकून पूरे घाव भर आया  मैं था अकेला जो घर से  अकेला ही चला आया । अब समझ आती है ये बात थोड़ा सा मेहनत  जिंदगी की बदल देती है रात  जो तुझको ज्ञान दे  उसपर न ध्यान दे  आने वाली गाड़ी को अपने टाइम से जान दे ज...
जग ने सब छीना मुझसे जो भी मुझे प्यारा लगा। सब जीत गए मुझसे मैं हरदम ही हारा।। 😐

मर्ज़

Marz हर मर्ज की दवा होती है बस आपको खरीदना नहीं पड़ता  लोग खुद ही दे जाते हैं कुछ लोग तो होते ही  बेईमान है  उनको ईमान बेचना नहीं पड़ता  खुद ही सरेआम बिक  जाते हैं, कुछ तो  कुछ तो खुद का दाम  भी अच्छा लगाते हैं। धोखा, ऐसी चीज है  जो बिना खाए समझ में नहीं आती और वो लोग कहते हैं कि "कैसे विश्वास कराऊं तुमको  ये बात मुझे समझ नहीं आती" पांव में ठोकर लगे खून बह जाए तो ही अच्छा है । घर खाली हो तो  कोई कुत्ता या टॉमी पाल लो बस दूर रहना इन आस्तीन के  सांपो से जो तुमको असहाय करके सहारे के लिए अपनी अहमियत गिनाते हैं कि हर मर्ज की दवा होती है तुमको खरीदना नहीं पड़ता लोग खुद ही दे जाते हैं।।😐😐 -✍️ Santo  

प्रेम

 प्रेम,प्रेम ही होता है  चाहे वो राधा कृष्ण से करे  या मीरा कृष्ण से करे वो प्रेम ही था जो  सुदामा भी कृष्ण से किए थे प्रेम अलौकिक होता है जिसकी कोई सीमा नही होती इसके खातिर वो खुद का त्याग भी kar सकता है और किसी को पा भी सकता है किसी भी बंधन को तोड़ करके या किसी बंधन को जोड़ करके  कोई प्रेम करता है  तो श्री कृष्ण ही क्यों राधा के हैं तो श्री कृष्ण क्यूं राधा के हैं। 👍।  -✍️Santo
कि उंगली तुम हम पर  उठाते हो जरा अपने किरदार को तो देखो थोड़ा सी गलती क्या हुई हम पर बरस पड़ते हो जरा अपनी गलती का  परिणाम तो देखो एक बार अगर तुम सही होते  तो सबसे अलग न होते हर बार  कि उंगली तुम हम पर  उठाते हो जरा अपने किरदार को तो देखो। चंद रास्ते हैं जो  अकेले नहीं पार किए जा सकते कुछ को साथ लेकर चलना होता है मैं तो था ही नादान की  कुछ करना भी चाहूं तो वो होता नहीं है जिन रास्तों पे चलकर आया हूं सुना है कि कुछ लोग साथ छोड़ते भी हैं मै था बेगुनाहों सा फिर भी  लोग गुनहगार कहते रहे मुझे मालूम था की  मेरे साथ कुछ ऐसा हो रहा है जो न जाने कोन सा  मंजर सामने लायेगा  हां मैं ही गलत हूं  जरा खुद को तलाशों  मैं खुद ही गुनेहगार हो जाऊंगा जरा अपने किरदार को तो देखो मैं खुद ही गुनहगार हो जाऊंगा। जरा अपने किरदार को तो देखो।। ✍️Santo 😊  
कद्र न थी हमारी उनको हमने अपनी आप बीती उनको बताई but u can deserve better  का पाठ हमको ही पढ़ाकर हमको ही किनारे कर दिया मुझे मालूम था की मैंने अपनी बाते एक ऐसे पत्थर को बताई जिसे मैं हर बार पहले रखा  और सबसे ज़्यादा खास मानता था वो ऐसी दुआ थी जो कभी पूरी न होने को थी  और पूरी करना भी नही है शायद हां मैं भी मानता था उसको खुदा की तरह पर खुदा मेरे साथ था लोग नहीं। जब कुछ का साथ छूटता है तो दुनिया पराया लगने लगता है। कुछ सपने जो पूरे होते थे  बिना मांगे ही तब उनकी  कीमत कम हुआ करती है  आज जब को दिए हैं अपने  सूरज चांद को कब तक  उजाला करेगा, तारों से क्या ही उम्मीदें करना जब दिन में  खो जाते हैं और रात में सिर्फ  आंखों को भाते हैं तब मुझे सच में समझ आया कि You can deserve better than .....   - ✍️ Santo  

नींद

जब हमको नींद नहीं आती है तो ये राते भी बड़ी हो जाती हैं काटने से भी नहीं कटती  क्या कहूं ये रात वही है जो किसी के लिए नए  सबेरे का सूरज लेके आती है  और किसी का सूरज डूबा के  चली जाती है। जरा सा आंखे बन्द करके सोने की कोशिश करो  तो अंधेरे में बस घड़ी की टिक टिक  की आवाज आती है  कैसे बयां करूं मैं इस  भयावह काली रात को  की मुझे ही मेरी धड़कन  की आवाज सुनाई जाती है कि मैं कैसे बयां करूं  इस भयावह काली रात को कि मुझे ही मेरी धड़कन  की आवाज सुनाई दे जाती है। बदलते रहते हैं हम सिर्फ करवट फिर ये नींद नहीं आती है मैं कैसे बयां करूं इसको कि ये मुझे ही मेरी धड़कने सुना जाती है। लोग कहते हैं कि  पूर्णिमा की रात बड़ी अच्छी होती है और अमावस्या की बड़ी खराब  अरे उनसे पूछो ना कि जिसका कोई  प्रिय पूर्णिमा को छोड़ जाता है  और अमावस्या पर किसी  के घर का नया चिराग आता है। ये रात बड़ी लंबी होती है बड़ी हसीन और बड़ी गमगीन होती है जब हमको नींद नहीं आती है तो ये रातें भी बड़ी हो जाती हैं कि कैसे बयां करूं मैं इस भयावह काली रा...